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नगर की हलचल: विकास की राह या गरीबों के विनाश की तैयारी?

# 10 Jan, 2026

तखतपुर। नगर पालिका की हालिया सामान्य सभा की बैठक शहर में चर्चा का मुख्य केंद्र बनी हुई है। बैठक में लिए गए निर्णयों और प्रस्तावों ने जनमानस में कई सवाल खड़े कर दिए हैं। शहर के प्रबुद्ध जनों और आम जनता के बीच इस बात की जमकर चर्चा है कि ये निर्णय विकास के लिए हैं या किसी गरीब को उजाड़ने की साजिश? चौपाटी की नीलामी से ठेला संचालकों में हड़कंप नगर की चौपाटी में दुकानों की नीलामी को लेकर चर्चा जोरों पर है।

बताया जा रहा है कि नीलामी की राशि गरीबों के बजट से इतनी बाहर है कि पुराने ठेला लगाने वालों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि ऊँची बोली लगाकर बड़े व्यापारियों को लाभ पहुँचाने की कोशिश हो रही है, जिससे छोटे दुकानदारों के "पेट पर लात" पड़ना तय माना जा रहा है।

राम सदन का शुल्क: विधायक की मंशा और परिषद का निर्णय:– गरीबों की सुविधा के लिए सांस्कृतिक भवन के समीप 'राम सदन' का निर्माण किया गया है। शुरुआत में इसकी राशि को लेकर परिषद में भारी बहस हुई। जहाँ एक ओर तखतपुर विधायक डॉ. धर्मजीत सिंह ने इसे गरीबों के लिए पूर्णतः निःशुल्क रखने का सुझाव दिया था, वहीं नगरपालिका ने इस पर भारी शुल्क थोपने की तैयारी की थी।

पार्षद कोमल ठाकुर की जनहित की लड़ाई के बाद अंततः यह शुल्क 2000 रुपये तय हुआ, लेकिन विधायक की मंशा के विरुद्ध शुल्क लागू करने पर जनता में गहरा रोष है।

अंबेडकर परिसर हेतु जमीन के चयन पर सवाल:– हैरानी की बात तब हुई जब मोढ़े मार्ग स्थित 'छोटे-बड़े झाड़ के जंगल' वाली जमीन पर अंबेडकर परिसर बनाने की सहमति सभी पार्षदों ने दे दी। नगर के संभ्रांत नागरिकों का कहना है कि ऐसी विवादित या अनुपयुक्त जमीन के बजाय अंबेडकर परिसर को मंगल भवन परिसर में बनाया जाना चाहिए। इससे परिसर का उचित रख-रखाव हो सकेगा और वह सुरक्षित भी रहेगा।

निस्तारी जमीन पर शौचालय का विवाद:– पुराने बस स्टैंड स्थित प्रतिष्ठित व्यवसायी रवि खुराना की निस्तारी जमीन पर जबरन शौचालय बनाने का प्रस्ताव भी चर्चा का विषय बना हुआ है। इस प्रस्ताव से गली के निवासी नईम खान और परस मंगलानी जैसे लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। सवाल यह उठ रहा है कि जब पास ही एवन होटल के समीप पहले से शौचालय उपलब्ध है, तो फिर किसे परेशान करने की नीयत से यह नया प्रस्ताव लाया गया? हालांकि, एक पार्षद के कड़े विरोध के बाद फिलहाल इसे टाल दिया गया है।

टैक्स वसूली और न्यायालय की चेतावनी:– अंत में बैठक का मुद्दा 'नारू कपड़ा दुकान' पर आकर टिका। नगरपालिका प्रशासन ने टैक्स वसूली के लिए माननीय न्यायालय की शरण में जाने की बात कही है। दूसरी ओर, आम जनता के बीच चर्चा है कि व्यवसायी खुद टैक्स पटाने के लिए नगरपालिका के चक्कर काट-काट कर थक चुका है, लेकिन विभाग की प्रक्रियाएं सुस्त हैं।

अब जनता यह समझने की कोशिश कर रही है कि परिषद की यह कार्यप्रणाली नगर के विकास के लिए है या आम जन को प्रताड़ित करने के लिए।

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